याद
जब - सब अपने नगमों की नुमाइश लगाते हैं और बदले में औरों की वाहवाही पाते हैं तो - मुझे तुम्हारी जबरदस्त याद आती है क्यूंकि तुम बिन मेरी कवितायें खो जाती हैं और - नज्म हो भी तो नुमाइश का मन नहीं होता तुम बिन तो वाहवाही में भी वजन नहीं होता...
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विकास कुमार
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[21 May 2009 03:01 AM]



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