इसका शीर्षक आपको स्वयं रखना है . . .
ईश्वर एक है परन्तु उसके रूप अनेक हैं इस बात को बहुत ही ज्ञानी ध्यानी, साधु महात्मा पहले ही कह चुके है, फिर उस बात को दोहराना कोई बहुत जरूरी तो नहीं है, लेकिन अपनी बात की शुरूआत सिर्फ इसी लहजे से हो सकती है . . . कोई आठ-दस साल पहले की बात है, हमार...
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kuchh padhna hai
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[21 May 2009 02:42 AM]



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