भरम न हो तो

गीत-ग़ज़ल वो साथ नहीं आयेगा , साथ चलने का भरम होता है भरम न हो तो ये दिल तन्हाँ होता है दिल टूटे या सलामत रहे , भरम को साबुत रख कर चलने की वजह बनता है चारों ओर जो ही तू है , मेरी हस्ती क्या है और बता कैसे गुमाँ बनता है सुबहों को शामों में ढलते देख रही हूँ , दि... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[21 May 2009 01:23 AM]

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