शुभ प्रभात
सुबह हो गयी है. अर्धांगी कल निकल गयी आधी जान को वापस पाने के लिए अभी तक अचेत लेटी है. पुत्र जागते हुए लेट कर ऊर्जा बचा रहा है ताकि आज कल से ज्यादा साईकिल चला पाए. बेटी अपने पौनबोली (यह अधबोली से थोड़ा ज्यादा हुआ) में यह सोच कर कि सब सो रहे [...]...
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कौतुक
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[20 May 2009 22:27 PM]



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