कहां फना होगया....।
कहां फना होगया....। वो ढलती शामें जब आती थी शबाब पर तब होता था मिलना हमारा-तुम्हारा। कहां खो गया....। वो ढलती रातें जब होती थी उफान पर वो छलकाना जाम हमारा-तुम्हारा। कहां गुम हो गया....। लालिमा लिए आसमां ढलती रात के साए में तेरे आंगन में, होता था साथ...
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Nitish Raj
poetry
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[20 May 2009 21:28 PM]



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