तुम साथ थे हमारे

क्षितिज तुम साथ थे हमारे माना कि ग़म बहुत थे, रस्ते बड़े कठिन थे, लेकिन यही क्या कम था तुम साथ थे हमारे। झंझा उठा भयानक, तूफ़ां से घिर गये हम छूटा कहां किनारा, कुछ भी न देख पाये, बिजली चमक के सहसा , दिखला गई नये किनारे। तुम साथ थे हमारे । मांगा कहां था हमने,... [पूरी पोस्ट]
writer उषा वर्मा
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[20 May 2009 17:15 PM]

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