दुनिया का दुःख

परिचर्चा अपनी खुशी पर हम खुश हुए कम औरों के ग़मों ने जी बहला दिया. दुःख तो अपने दामन में थे बहुत कम औरों के सुख ने ही जी जला दिया. Posted in चलते चलते, हिन्दी Tagged: कविता... [पूरी पोस्ट]
writer कौतुक
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[20 May 2009 05:40 AM]

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