वो करें जो गोबर तो वाह- वाह करते हैं.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़ज़ल ब्लाग की सियासत में, खूब ये झमेले हैं. लोग रोज़ आ, आ, के, अपनी अपनी पेले हैं. वो करें जो गोबर तो, वाह-वाह करते हैं. हम करें जो उँगली तो, मुश्किलों से झेले हैं. भैंसियों के वे हुस्न पर, देखो जान छिड़के हैं, पूँछ के सभी आशिक, सब के सब मचेले हैं.... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[20 May 2009 03:12 AM]

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