मासूम-सा दिल है ऐ "तारिका".......
कितनी बदल गई तस्वीरें, क्या थी खुशियां क्या थे गम, खुद को ही न पहचान सके, जब टकराये खुद से ही हम। जब-जब याद करें वो लम्हें, आंखें भूल गई ज्योती, टूटे माला के मनको-सी, टपक रहे मन के मोती। सपने रह-रह तङपाते हैं, अफसाने....बस बन जाते हैं, जैसे कोरे कागज...
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PREETI BARTHWAL
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[19 May 2009 20:34 PM]



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