गजल -- शीश महल के हर चेहरे को अपना समझा था -- वीनस केसरी

आते हुए लोग आज जो भी लिख पा रहा हूँ गुरु जी श्री पंकज सुबीर जी के आर्शीवाद से ही संभव हो पाया है प्रस्तुत गजल भी आपके द्वारा सुधरी जाने के कारण ही प्रस्तुत करने के योग्य बन पाई है शीश महल के हर चेहरे को अपना समझा था भूल हुई जो हर किरदार को अच्छा समझा था . आज तुम... [पूरी पोस्ट]
writer venus kesari
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[19 May 2009 15:53 PM]

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