एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का
बगीचे में एक अजीब इत्तफाक हुआ, फूलों के मध्य अदभुद संवाद हुआ, प्रकृति की विडम्बना देखिये..... उस अनोखी कथा कि मैं साक्षी बनी हूँ, भाग्यशाली हूँ शायद, जो बयां करने लायक बनी हूँ.............. एक फूल ने दूसरे फूल से कहा, जब तितलियाँ इठलाती हुई, पंख फड़फ...
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Priya
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[19 May 2009 10:37 AM]



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