कहानी...सबकी..
वो खुशबू पीछे रह गयी आसमान पर ये बादल घनेरे हैं ... कुछ बूँद भी झर चुके हैं मैं तेरे आँचल की छाया में बैठा हूँ , आ ँख मूंदे। खुशबू जो सालों पहले छोड़ आया था मेर े अन्दर समा रही है ... यकायक मेरा - तेरा रिश्ता भी तो पुराना है जब उमड़ते - घुमड़ते बादल क...
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सबकी कहानी
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[19 May 2009 09:19 AM]



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