कहानी...सबकी..

कहानी...सबकी.. वो खुशबू पीछे रह गयी आसमान पर ये बादल घनेरे हैं ... कुछ बूँद भी झर चुके हैं मैं तेरे आँचल की छाया में बैठा हूँ , आ ँख मूंदे। खुशबू जो सालों पहले छोड़ आया था मेर े अन्दर समा रही है ... यकायक मेरा - तेरा रिश्ता भी तो पुराना है जब उमड़ते - घुमड़ते बादल क... [पूरी पोस्ट]
writer सबकी कहानी
views
18
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
1
[19 May 2009 09:19 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix