विज्ञान बढ़ा इतना कि दौड़ मच गई पाने की, इच्छाऐं जागी जागी जन जन में भौतिक सामान जुटाने की।
भौतिक विज्ञान बढ़ा इतना कि दौड़ मच गई पाने की , इच्छाऐं जागी जागी जन जन में भौतिक सामान जुटाने की। कैसी रीति यहां पर आई अपने को बड़ा दिखाने की .. साठ बरस के बाद भी आजादी की करूण कहानी है .. आजादी के मूल्यों की मिटती जा रही निशानी है। ...... जैसी मर्मस्...
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प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर
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[19 May 2009 09:16 AM]



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