जय हो, भारत भाग्य विधाता जय हो...

अभिवर्ल्ड चचा हंगामी लाल बहुत दिनों तक शहर से बाहर रह कर रात ही लौटे थे। हमें उनके आने की सूचना मिल गई थी सो सोचा रहे थे कि चाय वाय पीने के बाद जरा चचा से उनके हाल पूछ आएंगे। पर ये क्या चचा तो सुबह होने के साथ ही हमारे कमरे में हाजिर थे। आते ही बोले भाई दिल खु... [पूरी पोस्ट]
writer abhishek
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[19 May 2009 07:28 AM]

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