क्या तुम्हें मालूम है?

क्षितिज क्या तुम्हें मालूम है? तुम्हारे आते ही, बेला महक उठा चारों तरफ़ से मेघ घिरे आकाश में , एक ध्रुव तारा चमक उठा । हिम खंड पिघल कर, विस्तार पा गया। खेत खलिहानों में समा गया। इच्छाओं आकांक्षाओं के तमाम पौधे लहलहा उठे। अग्निबाहु फैल कर तपिश के, तमाम राज़ ख... [पूरी पोस्ट]
writer उषा वर्मा
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[19 May 2009 07:04 AM]

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