महाप्रयाण से भयभीत न हों
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युध्रुवं जन्ममृतस्य च । तस्माद परिहयेअर्थे न त्वं शोचितुमहर्सी । । श्री मदभगवद्गीता में श्री कृष्ण कहते हैं कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है और मृत्यु प्राप्त करने वाले का जन्म निश्चित है । तो हे अर्जुन !! तुम व्यर्थ की बात...
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Renu Sharma
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[19 May 2009 05:12 AM]



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