जय हो! जनता जनार्दन की

कलम का सिपाही हां, यह जनता जनार्दन ही तो है जिसने बड़े-बड़े सूरमाओं को धराशायी कर दिया। उनके सपनों को मिट्टी में मिला दिया। जो कल तक इस बात पर ऐंठे फिरते थे कि उनका तीसरा, चौथा या न जाने कौन-सा मोर्चा गद्दी संभालने वाला है, अब गद्दी संभालने वाले उनसे कन्नी काट रहे... [पूरी पोस्ट]
writer Rajesh Tripathi राजेश त्रिपाठी
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[19 May 2009 01:53 AM]

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