प्रशस्तियाँ

Beyond The Second Sex (स्त्रीविमर्श) एकालापप्रशस्तियाँ मैंने जब भी कुछ पायामर खप कर पायाखट खट कर पायाअग्नि की धार पर गुज़र कर पाया पाने की खुशीलेकिन कभी नहीं पाई खुशी से पहले हर बारसुनाई देती रहीं मेरी प्रशस्ति मेंदुर्मुखों की फुसफुसाहटेंधोबियों की गालियाँऔर मन्थराओं की बोलियाँ शिक्षा ह... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[19 May 2009 00:35 AM]

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