क्षत्रिय उग्ररूप का शिलालेख

प्रकाश पाखी सार्थवाह धनगुप्त ने अपने कारवाँ पर नजर डाली.टीले की ऊंचाई से वह अपनी बैलगाडियों की पंक्ति का अंतिम छोर अच्छी तरह से देख पा रहा था.वह वर्षों से अपने कारवाँ के साथ व्यापार करता आ रहा था.पर इस मार्ग से कई बरसों बाद गुजर रहा था.आज का मार्ग कुछ अधिक ही दु... [पूरी पोस्ट]
writer abhivyakti
views
22
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
2
[17 May 2009 10:19 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix