चाहत पंछी की
बस्तियों से गुजरना हमारी चाहत नहीं , बागों से विचारना हमारी चाहत नहीं , समंदर की लहरों ' औ ' अनजानी राहों पर , सबको गीत सुनना हमारी चाहत नहीं । हमारी तो चाहत है बस एक ही , शाम ढले नीड़ों में लौटने की , जहाँ की हर खुशियाँ समेटे हुए , चुग्गा और दानों की...
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Navnit Nirav
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[18 May 2009 13:50 PM]



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