मौन
यह कविता कथाक्रम के ताज़ा अंक में प्रकाशित हुई है। लखनऊ से निकलने वाली इस पत्रिका में कविता का कालम वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना जी देखते हैं।) हडप्पा की लिपि की तरह अब तक नहीं पढी जा सकी मौन की भाषा… पानी सा रंगहीन नहीं होता मौन आवाज़ की तरह इसके भी होते ह...
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अशोक कुमार पाण्डेय
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[18 May 2009 12:22 PM]



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