एक कविता : तुम जला कर....
तुम जलाकर दीप रख दो आँधियों में \ जूझ लेंगे जिन्दगी से पीते रहेंगे गम अँधेरा ,धूप ,वर्षा सब सहेंगे \ बच गए तो रोशनी होगी प्रखर मिट गए तो गम न होगा \ धूम-रेखा लिख रही होगी कहानी "जिन्दगी मेरी किसी की भीख न थी ---आनंद...
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आनन्द पाठक
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[18 May 2009 11:27 AM]



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