तुम सा कौन पुजारी होगा,

हृदय गवाक्ष पता नही मौसम का असर है या माहौल का कुछ लिखा नही जाता आजकल या फिर सोचा ही नही जाता होगा....! मशीनी जिंदगी क्या सोचे..?? जब सोचती भी है तो बस पुराना सोचती है। तब ऐसा था..अब ऐसा है..! तब ऐसा क्यूँ था..?? अब ऐसा क्यूँ है..?? अतीतजीवी हो गई हूँ शायद। लीजि... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान
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[18 May 2009 05:34 AM]

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