तेरा चले जाना .......

कविताओं के मन से जब मैं तुझे छोड़ने उस अजनबी स्टेशन पर पहुंचा ; जो की अब मेरा जाना पहचाना बन रहा था …. तो एक बैचेन सी रात की सुबह हो रही थी ...... एक ऐसी रात की , जो हमने साथ बिताई थी ज़िन्दगी के तारो के साथ .. जागते हुए सपनो के साथ और प्यार के नर्म अहसासों के साथ ..... [पूरी पोस्ट]
writer Vijay Kumar Sappatti
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[17 May 2009 21:49 PM]

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