देखो-देखो ये महाकाल..........
नेताओं ने, फेंका जाल, फसी है जनता, बुरे हाल, महंगाई की, पङी है मार, देखो-देखो, ये महाकाल। लूटपाट का, बना माहोल, बाद में लूटे, पहले मांगे वोट, बाहर खोलें, एक दूजे की पोल, अन्दर सबका, डब्बा गोल। तुम भी पेट भरो रे भैया, हम भी माल दबायेंगे, जनता भोली बहक...
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PREETI BARTHWAL
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[17 May 2009 21:06 PM]



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