कैसी अफीम घुली थी उन दिनों मंे

उनींदरा कुछ तो ऐसा है जो मुझे समझ नहीं आता, जिसे डीकोड करने की कोशिश में अक्सर मैं उस जगह जाकर खड़ा होता हूं , जहां से पहली बार उसे आते हुए देखा था। अब वहां खड़ा होने पर मैं उसे नज़र नहीं आता... न ही वहां खड़े हुए उसका आना मैं देख पाता हूं। इस पहेली का सिरा कहां... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा
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[17 May 2009 12:59 PM]

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