गीत
मित्रों ,कभी कभी कुछ भाव हैं जो गीत की शक्ल में ही आते हैं तब मैं न चाहते हुए भी गीत लिख लेती हूँ हालाँकि गीत मेरी विधा नही है .इस गीत की प्रेरणा आदरणीय बुद्धिनाथ मिश्र जी के एक प्रसिद्ध गीत -" एक बार जाल और फेंक रे मछेरे , जाने किस मछली में बंधन की...
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सीमा रानी
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[17 May 2009 05:52 AM]



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