बच्चन की मधुशाला

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का कविता अमूर्त से मूर्त का चेतन स्वरुप हैं। ये एक विचारक की संवेदना की उस पराकाष्ठा को चित्रित करती हैं जिस विचारूपी महासागर में वो गोता लगाकर, उन भावो को जी कर, कभी कविता, कभी कहानी, कभी ग़ज़ल, तो कभी किसी और रूप में बाहर निकल, लोगो के बीच पहुँच, उनका... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[17 May 2009 04:44 AM]

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