हमने अपने आप को अक्लमन्द, छोटा और हास्यास्पद पाया

कबाड़खाना नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित पोलिश कवयित्री शिम्बोर्स्का की कविता 'घटनाओं का एक संस्करण' का एक अंश...कोई नहीं चाहता थाअपनी या किसी दूसरे की भ्रान्तियों का शिकार बनना.भीड़ के दृश्यों, जुलूस वगैरह के लिए स्वयंसेवक कोई नहीं बनान ही मरती हुई जनजातियों के ब... [पूरी पोस्ट]
writer Ashok Pande
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[17 May 2009 03:29 AM]

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