मन माला सब बिखर रही है गीत कौन सा मै गाऊँ

Kavi Sparsh मन माला सब बिखर रही है गीत कौन सा मै गाऊँ बढ़ा कारवां लक्ष्य साध, मन दुविधा में, क्या रुक जाऊं? सिमट सिमट के रह जाएगा, काल चक्र की परतों में बस बुना बटोरा तिनका तिनका रिश्तों का हर ताना बाना। धर्म कर्म कर्तव्य में उलझी अभिलाषा की जंजीरों से, मुक्त हो... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश
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[16 May 2009 12:44 PM]

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