होमी की मौत को लाल सलाम

रेवा इप्टा के जरिए वामपंथी आंदोलन में कुछ दिनों सक्रिय रहने के बाद भी होमी दाजी के बारे में ज्यादा नहीं जानता था। इंदौर आने के बाद उनकी शख्सियत के बारे में पता लगा। वे बीमारी से लड़ रहे थे और अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर थे। इसलिए उनके व्यक्तित्व का जादू भी... [पूरी पोस्ट]
writer ओम द्विवेदी
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[16 May 2009 09:48 AM]

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