फिर आज मिले, बिना आहट

POEM OF SOUL मिले तो हैं, पहले भी हम, फिर आज मिले, बिना आहट, जिंदगी और हम। जिंदगी ने पूछा मुझसे, आकर दबे पांव। क्यों उदास बैठा, कहां फंसी तेरी, जिंदगी की नाव? मैं, एक भंवर की तरह लाखों सवालों से घिरा, जिंदगी की तलाश में भटकता रहा, मंजिल की राह में। कब होगी मुकम्म... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[15 May 2009 21:18 PM]

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