बाबा की यह कविता आज होने वाले फैसले की जान है

आज़ाद लब सच कहूं तो मैं इन लोगों के प्रति इतनी बे-नाकामी से घिरा था कि यह अद्भुत कविता याद ही नहीं आयी. कल एक चैनल तो सीधे हमारी ब्लॉग कम्युनिटी से बाबा की कविता के कुछ अच्छे लोगों द्वारा (मैं इरफ़ान के ब्लॉग से वहां गया था) गाए गए अंश सुना रहा था और बेशर्मी स... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[15 May 2009 16:53 PM]

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