टुकडा -टुकडा जिंदगी

kuch kavitayen kuch hain geet चलो , इस टुकडा - टुकडा ज़िन्दगी को जोड़ कर , एक चादर सी लें । एक चादर , जो कभी तेरा लिबास बन जाए । कभी मेरा लिबास बन जाए । और जब वक्त की धूप हमारे सर पर आए , तो ये चादर हम दोनों का सरमाया बन जाए । चलो , इस टुकडा - टुकडा ज़िन्दगी को जोड़ कर , एक चादर... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा रानी
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[15 May 2009 12:29 PM]

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