सस्ता शेर
बाज़ार मंदा है, पर ज़िंदा है अभी.. पेश हैं ये चार शे'र- कुछ तमंचे शेष चाकू हो गये, यार मेरे सब हलाकू हो गये, ये इलेक्शन में जो हारे हर दफ़ा, खीझकर चंबल के डाकू हो गये, नग्न चित्रों का किताबों में था ठौर दुनिया समझती थी पढाकू हो गये, देख लो बापू ये बं...
[पूरी पोस्ट]
ऋतेश त्रिपाठी
26
3
0
3
2
[15 May 2009 12:12 PM]



Shuffle








