दूर के ढोल सुहावने.....!
आज बस जी चाहा कि किसी अनाम की टिप्पणी पर हम भी कुछ कहें.... काश ... सरहदें न होतीं .....सिर्फ अपने परिवार से दूर होने की चाहत से नहीं बल्कि कई ऐसे बिखरे परिवारों के दर्द को देख कर....जो चाह कर भी एक साथ नहीं रह सकते..... पिछली पोस्ट पर एनोनिमस महोदय/...
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मीनाक्षी
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[15 May 2009 01:18 AM]



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