बातें यादों की
लम्हों की बात करुँ तो , ये पल में गुजर जाते हैं , कैद करुँ मुट्ठी में तो , रेत से फिसल जाते हैं । सफर की बात करुँ तो , कई हसीन चेहरे मिल जाते है , चाहे गर रोकना तो , यादें छोड़ जाते हैं । मौसमों की बात करुँ तो , कई रंग निखर आते हैं , चटकी हुई हर कली क...
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Navnit Nirav
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[14 May 2009 10:21 AM]



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