एक "मैं "मेरा समकालीन नहीं

अमृता प्रीतम की याद में..... अमृता के लिखे ने हमेशा आम इंसान की भावनाओं ,वहां के माहौल को इस तरह से अपनी कलम से लिखा है कि हर किसी को वह अपने ही घर की .... कहानी लगती है ...वह परिवार मध्यवर्गी हो या चाहे है सिर्फ़ हर किसी को उस में अपना ही अक्स नजर आता है ...उनके उपन्यास एक खाली... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[14 May 2009 09:29 AM]

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