चार फूल औ शूल हज़ार

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai ऊँचे लोगों से व्यवहार । किन ख़्वाबों में हो तुम यार ॥ ये रस्ते आसान नहीं हैं चार फूल औ शूल हज़ार ॥ गर्दन, आँखे, कमर झुक गए जो भी हो आया दरबार ॥ बाट अलग लेने -देने के तुमसे कैसे हो व्यापार ॥ अब जाओ, कल बात करेंगे तुम पर कोई और सवार ॥ ११ सितम्बर २००५ पो... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai
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[14 May 2009 07:21 AM]

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