एग्जिट पोल पर चढ़कर गिरगिट बदलेंगे रंग और तमाशा देखेगी नीचे खड़ी जनता...
लीजिये, मतदान ख़त्म हो गया और अब केवल मतगणना के इंतजार है। बचपन से याद है। मेरा ख़याल है, यह १९८९ का चुनाव था, जब टीवी पर बाकायदा विश्लेषण देखने को मिला। उसके बाद तो कमोबेश हरेक आम चुनाव में अलका सक्सेना और योगेन्द्र यादव के चेहरे मतगणना के दिन दिख जा...
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ऋषभ कृष्ण
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[14 May 2009 06:55 AM]



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