......अब इंतजार बदहाली का
लोकतंत्र का महापर्व बीत गया। चुन लिए हमने अपने ही हाथों पांच साल तक लूटने वाले चोर। चोर वोट की अमानत को अपने कब्जे में लेने के बाद साहूकार बन गए हैं। सांसत में फंसी सांस को चैन दे रहे हैं। आराम कर रहे हैं। जनता की चिरौरी करके थक चुके अपनी थकान उतार र...
[पूरी पोस्ट]
मधुकर राजपूत
29
0
0
0
1
[14 May 2009 06:12 AM]



Shuffle








