फरीद के श्लोक - ३२
फरीदा दरीआवै कंनै बगुला,बैठा केल करे॥केल करेदे हंझ नो, अचिंते बाज पऎ॥बाज पऎ तिसु रब दे, केलां विसरीआं॥जो मनि चिति न चेते सनि,सो गाली रब कीआं॥९९॥साडे त्रै मण देहुरी,चलै पाणी अंनि॥आइउ बंदा दुनी विचि,वति आसूणी बंनि॥मलकल मऊत जां आवसी,सभ दरवाजे भंनि॥तिना...
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परमजीत बाली
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[14 May 2009 03:46 AM]



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