अफसुर्दादिली

फुरसत के रातदिन ये सपनों को हमारे छीन लेंगे फलक से यूँ सितारे छीन लेंगे यक़ीनन तुमसे मेरे और मुझसे तुम्हारे हर नज़ारे छीन लेंगे ज़माना है बड़ा बेदर्द सुन लो हमारे सब इशारे छीन लेंगे मैं अंजाम-ए-मुहब्बत जानता हूँ कि कश्ती से किनारे छीन लेंगे अब अपनी जीत तो मुमकिन नही... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक'शफक़'
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[14 May 2009 01:04 AM]

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