तन्हा नेक इरादे तुम
कितने सीधे-सादे तुम । बचपन के से वादे तुम ॥ लफ़्फ़ाजों की महफ़िल में तन्हा नेक इरादे तुम ॥ मेरी छोटी सी आमद है करते रोज़ तकादे तुम ॥ ठिठक गए बासंती झोंके पहने हुए लबादे तुम ॥ तृप्त भला कैसे हो लोगे प्यासा मुझे उठाके तुम ॥ मंजिल पर कैसे पहुँचोगे भारी गठर...
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joshi kavirai
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[13 May 2009 23:14 PM]



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