अटक कर बैठ गई मैं संबोधन पर
ऐसा हुआ कि जब गीतकलश पर गीत आया था " लेकिन सम्बोधन पर " तो उसके आधार पर कई मित्रों ने अपने अपने ढंग से कलम चलाई. तो फिर उसी क्रम में दूसरा गीत लिखा गया. दूसरे गीत के बाद से कई मित्रों के तकाजे हुए कि सिक्के का दूसरा पहलू भी दर्शाया जाये. अतएव यह पंक्...
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राकेश खंडेलवाल
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[13 May 2009 22:07 PM]



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