अटक कर बैठ गई मैं संबोधन पर

गीतकार की कलम ऐसा हुआ कि जब गीतकलश पर गीत आया था " लेकिन सम्बोधन पर " तो उसके आधार पर कई मित्रों ने अपने अपने ढंग से कलम चलाई. तो फिर उसी क्रम में दूसरा गीत लिखा गया. दूसरे गीत के बाद से कई मित्रों के तकाजे हुए कि सिक्के का दूसरा पहलू भी दर्शाया जाये. अतएव यह पंक्... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
views
30
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[13 May 2009 22:07 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix