सपने और सच की दूरी
ज़िंदगी हर पल एक नया रूप लेकर मेरे सामने आती है कभी कभी जो सपने मैने देखे थे लगता था वोह मैं सच करके ही रहूंगी. मैने कोशिश भी की उन्हे सच करने की, पर बीच बीच मे कई उलझनो ने उन्हे तोड़ने की कोशिश की. एक पल ऐसा भी आया जब मुझे लगा मेरा हॉन्सला टूट गया ह...
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Surbhi
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[03 Dec 2006 03:34 AM]



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