सपने और सच की दूरी

थोड़ी सी ज़मीन, थोड़ा सा आसमान ज़िंदगी हर पल एक नया रूप लेकर मेरे सामने आती है कभी कभी जो सपने मैने देखे थे लगता था वोह मैं सच करके ही रहूंगी. मैने कोशिश भी की उन्हे सच करने की, पर बीच बीच मे कई उलझनो ने उन्हे तोड़ने की कोशिश की. एक पल ऐसा भी आया जब मुझे लगा मेरा हॉन्सला टूट गया ह... [पूरी पोस्ट]
writer Surbhi
views
7
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[03 Dec 2006 03:34 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix