मेरे हिस्से का...
सब कहते हैं मैं रिश्ते बनाना बहुत अच्छे से जानती हूँ, मैं रिश्तों को निभाने की बजाय जीने समझ यक़ीन करती हूँ. जिस रिश्ते की शुरुआत ख़ूबसूरती से हुई, जिसका आधार सच्चाई और विश्वास है वो रिश्ता आजीवन ख़ूबसूरत ही रहेगा. चंद लम्हों की कड़वाहट मेरे रिश्तों...
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Surbhi
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[17 Apr 2007 15:23 PM]



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