दर्पण- श्री सतीश चन्द्र झा
अछि दर्पण टांगल देबाल पर देखि लेब किछु क्षणिक ठहरि क'। करब कर्म जे अपन दिन भरि आयत मुख पर भाव उतरि क' । बनतै नहि प्रतिबिम्ब झूठ के उचित कर्म सँ छिटकत आभा। कवि- श्री सतीश चन्द्र झा , व्याख्याता, दर्शन शास्त्र, मिथिला जनता इंटर कॉलेज, मधुबनी अनुचित करब...
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सम्पादक: कतेक रास बात
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[13 May 2009 11:20 AM]



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