मैं पंख लगा उड़ जाऊंगा...
कहता है मुझसे, मैं ना फिर आऊंगा... तू... जीले पल... पल... रो के, हंस के मैं पंख लगा उड़ जाऊंगा... यों जागा सा जो सोता है, इसलिए तू मुझको खोता है? पलभर में ही मिट जाता है, यहाँ जो मुझसे टकराता है भला कौन मुझे है बाँध सका, मैं तेरे हाथ ना आऊंगा... तू......
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मीत
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[13 May 2009 07:16 AM]



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