तेली का तेल जले, मशालची की....

कहासुनी अपने देश में कई ऐसे गीत, छंद और मुहावरे हैं, जिन्हें लोग भद्रता की सीमा से परे मानते हैं, लेकिन मौके पर वो काफी सटीक बैठते हैं। ऐसा ही मुहावरा है, तेली का तेल जले, मशालची की.... । इसका मतलब होता है, नुकसान किसी का और तकलीफ किसी दूसरे को. दरअसल ये मुह... [पूरी पोस्ट]
writer ऋषभ कृष्ण
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[12 May 2009 23:25 PM]

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